जश्ने आज़ादी_2018

#स्वतंत्रता_दिवस

आज हमारा देश इतना आज़ाद हो चुका है कि यहाँ कोई किसी का जब मन करे तब इज्ज़त लूट सकता है, राह चल रहे किसी की बहन-बेटी को छेड़ सकता हैं, जब जी चाहे बलात्कार कर सकता है, (इंसान तो इंसान जानवर भी अब नही बचें) । शेल्टर होम जैसे सामाजिक कार्य के आड़ में घिनौना धंधा कर सकता है। आप खुल कर घरेलू हिंसा भी कर सकते हैं। रुपयों-पैसों, जमीन-जायदाद के लिए एक दूसरे को मौत के घाट उतार सकते है। और अगर फिर भी मन ना भरे तो आप राजनेता बन कर लोगो का हुतियापा भी काट कर पैसा कमा सकते हैं।

मल्लब जो जी चाहे वो कर सकते है भई आप.. आखिर आप एक आज़ाद देश के आज़ाद नागरिक है। इतनी आजादी कहा मिल सकती है आपको??… आज़ादी तो ठीक थी पर इतनी ज्यादा आज़ादी??.. क्या हमें यही आजादी चाहिए थी?

आज हम सब भारतवासी आज़ादी के 72वें वर्षगाँठ की खुशियाँ मना रहे है। बहुत खुशी होती है ये देख कर की आज के युवा को इतना जुनून है अपने देश के लिए। लेकिन क्या सिर्फ एक दिन की ख़ुशी के लिए??..
नही ना..??
स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस आया नही की लोगो के अंदर देश भक्ति बारह महीने से सो रहे कुम्भकर्ण की तरह एक दिन के लिए जाग जाती हैं।
और फिर देखिए जनाब कैसे इनके व्हाट्सएप्प, फ़ेसबुक, ट्विटर जैसे सोशल प्लेटफार्म के डिस्प्ले प्रोफाइल में इनके वाल पर तमाम तरह के देश भक्ति से सम्बंधित पोस्ट और तिरंगा मिल जाएंगे, और सारी देशभक्ति दो दिन के बाद फिर से ठंडी हो जाती हैं।

प्रश्न ये है कि क्या वाकई में हम आज़ाद है??
जब भारत अंग्रेज़ों का गुलाम था तब से आज तक मे क्या फ़र्क़ आया, हाँ अंग्रेज़ों से जरूर आज़ाद हो गए है लेकिन अपने ही देश मे हम एक दूसरे का गला घोंटने में उतारू हो चुके है।
सबसे बड़ी समस्या तो यही है लोग दीमक की तरह होकर आपस मे ही देश को अंदर से खोखला करते जा रहे है। हम हर साल आज़ादी का जश्न मनाते है लेकिन ये कोई नही सोचता कि आप किस आज़ादी का जश्न मना रहे हो।
आज इस देश में लोग अपनो से ही सुरक्षित नही है, कब..कहाँ.. कौन सा वारदात हो जाये कुछ कहा नही जा सकता।
सच कहूँ तो आज हम राजनेताओं के सिर्फ गुलाम भर बन कर रह गए है। राजनेता सिर्फ और सिर्फ हर पाँच साल पर अपने मुख से मीठे-मीठे झूठे वादे कर के चले जाते है और पाँच साल तक वही जनता जिन्होंने खुद अपना जननायक चुना है फिर उसी नेता को गालियाँ देती रहेंगी। और फिर अगले पाँच सालो बाद फिर से किसी को अपना जननायक चुन लेगी और यह प्रकिया हर पाँच साल पर चलती रहेगी।

आज अफ़सोस होता होगा हमारे उन वीर सपूतों के आत्माओं को जिन्होंने इस देश की आज़ादी के लिए खुद की बलि चढ़ा दी। शायद इन दिनों के लिए उन्होंने खुद को देश पर न्योछावर नही किया होगा।

अगर हम बात कर रहे है आज़ादी की तो सिर्फ देश को दुश्मनों के हाथों से आज़ाद करना ही आज़ादी नही है। हम सब को सबसे पहले अपने दिल और दिमाग में घर कर चुके गुस्से को, वैहशिपन को, जलन को, इर्ष्या को इन जैसी तमाम मानसिकता को खुद के अंदर से आज़ाद करना पड़ेगा तब जाकर हम सच मे आज़ाद हो सकते है।

सबसे पहले हर वर्ग के लोगो को अपनी मानसिकता बदलनी होगी फिर आप गर्व से कहिये न कि हम आजाद देश के सभ्य नागरिक है।
इसमे आपको भी दिल से ख़ुशी होगी और सामने वाले को भी। सिर्फ एक दिन के दिखावे के लिए हम झंडा फहरा कर खुद को आज़ाद देश के नागरिक कहलवा लेंगे तो, जनाब… ये आपकी सबसे बड़ी भूल है।
अगर आज़ादी ही चाहिए तो पहले आप अपने अंदर के शैतान से खुद को आज़ाद कीजिये फिर आज़ादी का परचम खुशियों से लहराते फिरिएगा।

धन्यवाद🙏🙏

©Rahul Seth

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